कलर डॉप्लर: टेस्ट से पहले जानिए कुछ जरूरी बातें…

कई बार आपको स्वस्थ करने के लिए डॉक्टर को विज्ञान की मदद लेनी पड़ती है. क्योंकि ये आपके शरीर के लिए बेहतर, सुरक्षित और तेज नतीजे देने वाला है. यही सारी बातें कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउण्ड को खास बना देती हैं. कलर डॉप्लर टेस्ट के जरिए डॉक्टर बिना किसी एक्स—रे या फिर इंजेक्शन के बीमारी का पता लगा सकता है.

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कलर डॉप्लर टेस्ट में ध्वनि तरंगों को चित्र में बदला जाता है. इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर शरीर की धमनियों और नसों में रक्त के बहाव में आने वाली समस्याओं का पता लगा सकता है. कलर डॉप्लर टेस्ट Deep Vein Thrombosis (DVT) का पता लगाने वाला सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है. DVT ऐसी स्थिति है जिसमें पैर की नसों में खून के थक्के जमने लगते हैं. कई बार DVT गंभीर बीमारियों को जन्म देता है, जैसे फेफड़े में ​थक्के जमना. ये जानलेवा भी हो सकता है. इसलिए DVT के लक्षण दिखते ही इलाज शुरू करवा लेना चाहिए.

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मुझे इसकी जरूरत क्यों है?

DVT का सबसे प्रमुख लक्षण पैरों में सूजन आना या फिर दर्द होना है. डॉक्टर कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउण्ड के बाद असल समस्या का पता लग जाता है. जांच रिपोर्ट से डॉक्टर ये जान सकता है कि खून का प्रवाह

 कहां रुक रहा है और कहां पर धीमा हो रहा है? इससे पता चल जाता है कि आपकी नसों में थक्का जम रहा है.

डॉप्लर अल्ट्रासाउण्ड कई बीमारियों की जांच में बेहद कारगर है. कलर डॉप्लर को खून में ​थक्के ढूंढने के अलावा भी कई समस्याओं की जांच के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कलर डॉप्लर टेस्ट नसों, धमनियों और हृदय में रक्त प्रवाह की जांच करने का कारगर उपाय है. कलर डॉप्लर से Peripheral Artery Disease का भी पता लगाया जाता है. ये बीमारी पैरों, हाथ, पेट और सिर को प्रभावित कर सकती है. कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउण्ड से बंद पड़ी नसों में जमने वाले अवरोध का पता लगता है.

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कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउण्ड फूली हुई नसों और धमनियों में आई कमजोरी का पता भी लगाता है. इस समस्या को Aneurysm कहा जाता है, विशेष रूप से जब ये पेट में हो. Aneurysm होने पर मरीज के लीवर, गुर्दे, पैंक्रियाज और तिल्ली में रक्त प्रवाह में बाधा आ सकती है. पेट में ट्यूमर भी हो सकता है. कलर डॉप्लर टेस्ट से गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में रक्त प्रवाह की जांच भी की जा सकती है.

टेस्ट के लिए कैसी करें तैयारी

कलर डॉप्लर टेस्ट के लिए ढीले कपड़े पहनाए जाते हैं. कई बार डॉक्टर मरीज को गाउन भी पहना सकता है. टेस्ट के लिए जाते वक्त जूलरी को घर पर ही छोड़कर आएं. पेट में समस्या होने पर डॉक्टर टेस्ट से पहले करीब 6 से 12 घंटे तक उपवास की सलाह देते हैं. आप सिर्फ अपनी सामान्य दवाओं को लेने के लिए थोड़ा सा पानी पी सकते हैं. वहीं महिलाओं को गर्भावस्था में पेढू की जांच के लिए टेस्ट से एक घंटे पहले 32 आउंस पानी पीने के लिए कहा जाता है.

क्या होता है टेस्ट के दौरान

कलर डॉप्लर टेस्ट के लिए आमतौर पर आपको पीठ के बल लिटाया जाता है. डॉक्टर प्रभावित हिस्से की जांच के लिए उस पर जेल लगाता है. जेल लगाने से ध्वनि तरंगे आसानी से शरीर में प्रवेश करती हैं और बेहतर नतीजे भी देती हैं. इसके बाद जॉयस्टिक जैसे उपकरण को शरीर पर घुमाकर जांच की जाती है. इस डिवाइस से ध्वनि तरंगें निकलती हैं. ये ध्वनि तरंगें खून, कोशिका, अंदरूनी अंगों से टकराकर डिवाइस तक वापस आती हैं.

डिवाइस से जुड़ा हुआ कंप्यूटर सभी ध्वनि तरंगों का अध्ययन करने के बाद मॉनीटर पर लाइव दिखाता है. एक बार टेस्ट पूरा होने के बाद जेल को शरीर से पोंछा जा सकता है. कलर डॉप्लर टेस्ट को पूरा होने में बमुश्किल 30 से 60 मिनट तक लगते हैं. इस टेस्ट के नतीजे जल्दी ही सामने आ जाते हैं. कलर डॉप्लर टेस्ट सुरक्षित, दर्द रहित होता है. इसमें रेडिएशन का इस्तेमाल भी नहीं होता है.

mahi profile

लखनऊ शहर में कलर डॉप्लर टेस्ट करवाने के लिए आप माही डायग्नोस्टिकस में संपर्क कर सकते हैं. माही डायग्नोस्टिकस में आपको बेहतर तकनीशियन और डॉक्टरों की टीम का पूरा सपोर्ट मिलेगा. उनकी कुशल देखरेख में आपकी हर बीमारी के लक्षणों का टेस्ट आसानी से करवाया जा सकता है. माही डायग्नोस्टिक्स, पिकैडली होटल के सामने, कानपुर रोड पर स्थित है. माही डायग्नोस्टिक्स से आप फोन नंबर 0522—4074409 पर भी संपर्क कर सकते हैं. 

https://www.facebook.com/mahidiagnostics/

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